बंद आंखों से भी नज़र रखता है
बंद आँखों से भी नज़र रखता है
एक मेरा ही दिल तेरी ख़बर रखता है
उसी की होती है इज़्ज़त-ओ-अफजाई
जो अपने अंदर कुछ हुनर रखता है
एक नज़र मिलते ही ज़माना भूल जाओगे
मेरा साखी ऐसी नज़र रखता है
न जाने कितने दम तोड़ देते हैं राहे इश्क़ में
वही होता है पार जो जिगर रखता है
इस क़ायनात के ज़र्रे ज़र्रे से वाकिफ़ है तू
मौला तू वाहिद है फिर भी नज़र रखता है
जो भी बोलों खूब सोच समझ कर "आज़म"
तुम्हारा कहा तुम्हारे बाद भी असर रखता है
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