चुनाव

जो खिलाएगा दारू मास मछली
दिखाएगा वो कारनामें अश्ली
अगर होता सेवा भाव मन
न करता धन से बोट की बदली

रखियो इस बात का ख़्याल
वरना पछताओगे पांच साल

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